MyBlog


View My Stats

गुरुवार, 25 नवंबर 2010

आस अभी भी ...


आस अभी भी , प्यास अभी भी ,
जीने का अहसास अभी भी !

तुमको पा लेने की ख्वाहिश ,
खामोशी में आवाज़ अभी भी !

मैं हूँ कि जीता जाता हूँ ,
राह तके श्मशान अभी भी !

एक गुनाह किया था मैंने ,
आँखों से बरसात अभी भी !

'गिरि' को खुद कि खबर नहीं है ,
लेकिन सबकी याद अभी भी !


- संकर्षण गिरि

1 टिप्पणी:

  1. Guru AAp mahan ho....aap ka kuch book publish huwa hoga to please bata dijiye... I like 2 read it ...

    I m FAN of U

    उत्तर देंहटाएं