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शनिवार, 10 जुलाई 2010

ईश्वर के टुकड़े



वो जो नहीं दीखता , उसकी उपासना ,
और जो सामने है , उसकी अवहेलना करते हैं ,
परलोक सुधारने के लिए हम
न जाने क्या क्या भेस धरते हैं...!

कोई पत्थर की पूजा करता है ,
कोई बुतफ़रोश है ,
कोई अहिंसा का पुजारी है ,
कोई हिंसा के नाम पर ख़ामोश है !
अलग अलग धर्मों के अलग अलग पंगे हैं ,
ईश्वर के अल्लाह के नियम कितने बेढंगे हैं !
हम स्वर्ग या जन्नत की लालसा में मरते हैं ...

ऊपर वाला अब एक नहीं ,
इंसान अब नेक नहीं ,
हिन्दू और मुस्लिम के बीच दंगे आम हैं ,
तो क्या ईश्वर और अल्लाह का भी यही काम है ?
धर्म के ढकोसले आदमी को आदमी से दूर करते हैं !


-- संकर्षण गिरि

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढिया. लिखते रहो. अब अप्ने ब्लोग को hinkhoj.com पर डाल दो. साथ ही statcounter.com पर भी कर लो.

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  2. its is one of the good bolg about god ...... i like it very much. keep writing ......

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