चुभती हुई यादें ज़ख्म बन कर चिपक जाती हैं ... ज़िन्दगी से ... और छिड़कती रहती हैं नमक , स्वयं पर ही , ताकि ज़ख्म हरा बना रहे... हमेशा ! और उनके अस्तित्व को नज़र न लगे किसी शै की ! बहुत खूब संकर्षण भाई.यादों का खूब बढ़िया ताना बाना बुना है आपने.
जिस प्रकार भोजन का स्वाद मीठे, खट्टे,कडवे, तीखे आदि एहसासों के समन्वय से होता है वैसे ही जीवन में चुभन भरी यादों की भी अहमियत है....अच्छी रचना है
चुभती हुई यादें
जवाब देंहटाएंज़ख्म बन कर चिपक जाती हैं ... ज़िन्दगी से ...
और छिड़कती रहती हैं नमक ,
स्वयं पर ही ,
ताकि ज़ख्म हरा बना रहे... हमेशा !
और उनके अस्तित्व को
नज़र न लगे किसी शै की !
बहुत खूब संकर्षण भाई.यादों का खूब बढ़िया ताना बाना बुना है आपने.
जिस प्रकार भोजन का स्वाद मीठे, खट्टे,कडवे, तीखे आदि एहसासों के समन्वय से होता है वैसे ही जीवन में चुभन भरी यादों की भी अहमियत है....अच्छी रचना है
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